Sunday, November 18, 2007

HINDI

लोगों के बीच संवाद और व्यवहार भाषा से ही प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बनता है भाषा हमें जोड़ती है .... चाहे वो कोई भी भाषा हो , लेकिन मानव को प्रकृति में आत्मसात कर देने वाली, गद्य या पद्य दोनों में काव्यात्मकता का भाव देने वाली और हर प्रकार से संपूर्ण भाषा हिन्दी ही है...

सैंकडों साल दूसरों के अधीन रहने के कारण आज हमारे गुणसूत्रों में ही पराधीनता बस चुकी है.... फल स्वरूप आज भारत का युवा युवा तो है लेकिन उसमें यौवन नहीं है ... मैकाले की शिक्षा प्रणाली ने हमें क्लर्क बना दिया है और हमारे देश कि भाषा, साहित्य और सभ्यता लुप्त हो रही है .... साहित्यकार अंग्रेज़ी भाषा में साहित्य लिखना अपना बड़प्पन मानते हैं तो आम नागरिक इस भाषा में बातचीत करना जबकि ये सिद्ध करने कि आवश्यकता नहीं कि इंग्लिश का व्याकरण अधूरा है .... यह सांकेतिक अधिक है ...

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